*माँ और प्रकृति*
यदि मानव जाति अपराध करने से पुर्व ही ये विचार कर ले कि इचका अंत कितना कष्टकारी और पीड़ादायी हौगा तो ना ही अपराध हींगे ओर ना ही अपराध की भावना जन्म ले पायेगी।
माँ और प्रकृति
माधब गोगोई
संस्थापक
সংবাদ প্রতিবেদন মানৱ জাতিলৈ প্ৰকৃতি ৰক্ষাৰ আহ্বান — মাধৱ গগৈ অসম, ভাৰতঃ সমাজচিন্তক মাধৱ গগৈয়ে সমগ্ৰ মানৱ সমাজলৈ এক গভীৰ আহ্বান জনাইছে। তেওঁ...
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